आँखें किसी से न उलझ जाएँ मैं डरता हूँ।
आँखें किसी से न उलझ जाएँ मैं डरता हूँ।
क़ातिल नज़रों के वार से बचकर गुजरता हूँ।
अज़ीब फ़ितरत है इन नशीली फ़िज़ाओं की।
बचने की कोशिश में हर बार फिसलता हूँ।
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’
आँखें किसी से न उलझ जाएँ मैं डरता हूँ।
क़ातिल नज़रों के वार से बचकर गुजरता हूँ।
अज़ीब फ़ितरत है इन नशीली फ़िज़ाओं की।
बचने की कोशिश में हर बार फिसलता हूँ।
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’