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25 Jul 2025 · 1 min read

आँखें किसी से न उलझ जाएँ मैं डरता हूँ।

आँखें किसी से न उलझ जाएँ मैं डरता हूँ।
क़ातिल नज़रों के वार से बचकर गुजरता हूँ।
अज़ीब फ़ितरत है इन नशीली फ़िज़ाओं की।
बचने की कोशिश में हर बार फिसलता हूँ।

#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’

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