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25 Jul 2025 · 1 min read

चाँद-नखत अलकन धरे, मुख पर उजली भोर।

चाँद-नखत अलकन धरे, मुख पर उजली भोर।
कहाँ चलीं नत आनने ? देखो तो इस ओर।।

रूप रुपहला चाँद सा, चमका तम को चीर।
मंद-मंद मुस्कान से, हरता मन की पीर।।

“किंजल्किनी”

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