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24 Jul 2025 · 4 min read

हरश्रृंगार भवन में पावस गोष्ठी : भूमिका और स्थापना

एक 22 जुलाई का होना…

गत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी कल 22 जुलाई 2025 को साहित्यिक संस्था ‘हरसिंगार’ के तत्वावधान में गौड़ ग्रेशियस काँठ रोड स्थित ‘हरसिंगार’ भवन में कीर्तिशेष नवगीतकार दादा माहेश्वर तिवारी की जन्म जयंती के अवसर पर सम्मान-समारोह का आयोजन किया गया जिसमें लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. अखिलेश मिश्र एवं भोपाल की गीत कवयित्री डॉ. मधु शुक्ला को अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह, मानपत्र, श्रीफल तथा सम्मान राशि भेंट कर “माहेश्वर तिवारी साहित्य सृजन सम्मान” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने की। कार्यक्रम के आरंभ में नवगीतकार योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’ ने कार्यक्रम के बारे में बताया कि “कीर्तिशेष माहेश्वर तिवारी जी के जन्म दिन पर यह पावस गोष्ठी का कार्यक्रम 2010 से हर वर्ष हो रहा है और 2016 से प्रति वर्ष देश के गीत नवगीत के रचनाकार को सम्मानित किया जा रहा है जिसमें वर्ष 2016 में नई दिल्ली के वरिष्ठ नवगीतकार डाॅ. राजेन्द्र गौतम, प्रयागराज के वरिष्ठ नवगीतकार यश मालवीय व जयकृष्ण राय तुषार, नई दिल्ली के सुप्रसिद्ध कलाकार हरिपाल त्यागी तथा मुरादाबाद के वरिष्ठ गीतकार ब्रजभूषण सिंह गौतम अनुराग को, वर्ष 2017 में लखनऊ के वरिष्ठ नवगीतकार मधुकर अष्ठाना को, वर्ष 2018 में देहरादून के सुप्रसिद्ध नवगीतकार डाॅ. बुद्धिनाथ मिश्र, लखनऊ से वरिष्ठ कवयित्री संध्या सिंह, नोएडा से गीत-कवयित्री भावना तिवारी व सीमा अग्रवाल को, वर्ष 2019 में गाजियाबाद के वरिष्ठ नवगीतकार योगेन्द्र दत्त शर्मा एवं साहिबाबाद के वरिष्ठ नवगीतकार जगदीश पंकज को सम्मानित किया गया। इसके बाद कोरोना-त्रासदी के कारण वर्ष 2020 व 2021 में आॅनलाइन ‘पावस-गोष्ठी’ हुई और वर्ष 2022 में नई दिल्ली के वरिष्ठ नवगीतकार विजय किशोर मानव एवं नई दिल्ली के वरिष्ठ समालोचक ओम निश्चल को, वर्ष 2023 में मुरादाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. अजय अनुपम को सम्मानित किया गया। इसके पश्चात गत वर्ष 2024 में माहेश्वर तिवारी जी के निधन के पश्चात 22 जुलाई को हुए आयोजन में मुरादाबाद के वरिष्ठ शायर जमीर दरवेश, नई दिल्ली के वरिष्ठ गीतकार सुभाष वसिष्ठ एवं भोपाल के नवगीतकार मनोज जैन मधुर को ‘माहेश्वर तिवारी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया।’
कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध संगीतज्ञा बालसुंदरी तिवारी एवं उनकी संगीत छात्राओं- कु०लिपिका, कु० कशिश भारद्वाज, कु० पारिशा, कु० प्राप्ति, कु० अनाया, कु० प्रावर्शी, कु०आशी, गुमान, मनहर, खुद गौरांगी एवं तबला वादक राधेश्याम एवं विवेक द्वारा प्रस्तुत संगीतबद्ध सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात् उनके द्वारा सुप्रसिद्ध नवगीतकार श्री माहेश्वर तिवारी के कुछ गीतों की संगीतमय प्रस्तुति हुई- “तुमसे मिलकर खुद से मिलना बिल्कुल ऐसा है, कड़ी धूप में अमलतास के खिलने जैसा है…”, “गीतों भरी सुबह लगती है रंगों डूबी शाम, याद बहुत आते हैं कल के रिश्ते और प्रणाम…”, “याद तुम्हारी जैसे कोई कंचन कलश भरे…”, “काले-काले पंख शिलाओं ने फैलाए, बादल आए बादल आए…”, ” एवं “काच-कचौटी पीली धोती बादल भैया पानी दो” की संगीतमय प्रस्तुति की गई।
इसके पश्चात कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों ने यश भारती कीर्तिशेष दादा माहेश्वर तिवारी जी का उनकी जन्म जयंती पर भावपूर्ण स्मरण करते हुए उनके कालजयी रचनाकर्म पर चर्चा की। कार्यक्रम के दूसरे चरण में पावस गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें रचना पाठ करते हुए लखनऊ के डॉ अखिलेश मिश्र ने सुनाया- ‘बच्चे दादी से मुहब्बत की कहानी पूछें, कैसी थी बीते जमाने में जवानी पूछें, कौन राधा थी कौन मीरा थी कौन थी रुक्मिन, कौन थी रानी और कौन दीवानी पूछें।’ देहरादून के सुप्रसिद्ध नवगीतकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने सुनाया- ‘तुम क्या गये, नखत गीतों के असमय अस्त हुए, एक-एक कर आखर सारे, लकवाग्रस्त हुए।’ नई दिल्ली से उपस्थित सुप्रसिद्ध नवगीत कवि डॉ. सुभाष वशिष्ठ की अभिव्यक्ति इस प्रकार थी -‘कितनी ही दाँत कटी रोटिया, नपे-तुले शब्दों की हो गयीं, चटकते इरादों की आवाज़ें, बदहवास जंगल में खो गयीं।’ नोएडा से उपस्थित जाने-माने नवगीतकार राहुल शिवाय ने अपने भावों को अभिव्यक्ति दी – ‘देख रहे हैं थोड़े बादल, थोड़ा पानी देख रहे, पावस में हम सजल हवाओं की, मनमानी देख रहे।’ नोएडा से उपस्थित सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. भावना तिवारी की पंक्तियों ने सभी के अन्तस का इस प्रकार स्पर्श किया – ‘मेरे सब पंख कटा दो, साँसों की डोर घटा दो, कितने ही कारागार बुनो, या पहरे लाख बिठा दो तुम, ये पिंजरा सोने का स्वीकार नहीं मुझको।’ भोपाल से उपस्थित सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ मधु शुक्ला की ये पंक्तियाॅं भी सभी को आह्लादित कर गयीं – ‘देखे इन आँखों ने कितने, तीखे- मीठे खारे दिन। सोच रहे हैं गुमसुम बैठे, देहरी और दुआरे दिन।’
इनके अतिरिक्त स्थानीय उमाकांत गुप्त, डॉ. मनोज रस्तोगी, ज़िया ज़मीर, योगेन्द्र वर्मा व्योम, राजीव सक्सेना, डॉ पूनम बंसल, राजीव व्यास, राजीव प्रखर, ओमकार सिंह ओंकार, डॉ. प्रेमवती उपाध्याय, डॉ. कृष्ण कुमार नाज, अभिनव अभिन्न, मनोज मनु, मयंक शर्मा, शुभम कश्यप, दुष्यंत बाबा, डॉ. प्रदीप शर्मा, डी पी सिंह, राहुल शर्मा आदि स्थानीय रचनाकारों ने भी विभिन्न सामाजिक बिंदुओं को आधार बनाकर अपनी काव्यात्मक अभिव्यक्ति की। कार्यक्रम में आलोक शुक्ल (मुम्बई), डॉ ऋचा पाठक (काशीपुर), डॉ मीनू मेहरोत्रा, निखिल शर्मा, संतोष रानी गुप्ता, डॉ. बीना रुस्तगी(अमरोहा) आदि साहित्य प्रेमी भी उपस्थित रहे। संचालन वरिष्ठ ग़ज़लकार डॉ. कृष्ण कुमार नाज ने किया। कार्यक्रम संयोजक द्वय श्रीमती बाल सुंदरी तिवारी, आशा तिवारी एवं समीर तिवारी द्वारा आभार- अभिव्यक्ति प्रस्तुत की गई।

-योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’
मुरादाबाद
मोबाइल-9412805981

नोट-श्री योगेंद्र वर्मा ‘व्योम’ की फेसबुक वॉल से साभार यथावत कॉपी

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