सदाचरण के मार्ग पर, चलना ही तो धर्म।
सदाचरण के मार्ग पर, चलना ही तो धर्म।
कर्तव्यों का निर्वहन, बने सभी का कर्म।।
सत्पुरुषों के मेल से, जगमग मन-आकाश।
अंधकार ज्योतित करे, जैसे चंद्र-प्रकाश।।
“किंजल्किनी”
सदाचरण के मार्ग पर, चलना ही तो धर्म।
कर्तव्यों का निर्वहन, बने सभी का कर्म।।
सत्पुरुषों के मेल से, जगमग मन-आकाश।
अंधकार ज्योतित करे, जैसे चंद्र-प्रकाश।।
“किंजल्किनी”