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24 Jul 2025 · 1 min read

लाडो

🙏
!! श्रीं !!
🦚
आई बिटिया घर नहीं, अबकी सूनी तीज ।
झूला झूलेगी कहाँ , लाड़ो आँगन भीज ।।
लाड़ो आँगन भीज, याद बिटिया की आती।
भर आते हैं नयन, निगोड़ी बहुत रुलाती।।
लाड़ों से थी पली, लली हो ग‌ई पराई ।
बाधे बंधन कौन, डाक से राखी आई ।।

राधे…राधे …!
🌹
महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा !
***
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