Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
24 Jul 2025 · 1 min read

निर्दयी, बर्बर,आतंकी मनोवृति वाले शत्रु से लड़ने के लिए तुम्

निर्दयी, बर्बर,आतंकी मनोवृति वाले शत्रु से लड़ने के लिए तुम्हें उस शत्रु से भी ज्यादा निर्दयी और बर्बर बनना पड़ेगा यदि तुम ऐसा कर सकते हो तो तुम्हारी जीत निश्चित है और यदि तुम ऐसा नहीं कर सकते तो तुम्हारी हार निश्चित है, अब तुम्हें तय करना है कि तुम क्या चुनते हो जीत या हार…🙏🏃🏻जागते रहिए। आज हमारे धर्म को हमारे द्वारा ही लक्ष्य बनाया जा रहा है हमे एकजुट रहने की और अपने धर्म के प्रति एकता और अखंडता दिखाने की जरूरत है। धर्म हैं तो हम हैं और हम हैं तो राष्ट्र हैं इस बात का सदैव स्मरण रखे। प्रणाम, नमस्कार, वंदेमातरम् … भारत माता की जय 🚭‼️

Loading...