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23 Jul 2025 · 1 min read

तमन्ना

नगमा-ए-हिन्द जब लबों पर हो,
तमगा-ए-हिन्द जब सीने पर हो।
जुनून-ए-हिन्द जब जज्बा हो,
उल्फत-ए-हिन्द जब आरजू हो।
हसरतें नहीं किसी की आशिकी की,
फितरतें जब हों तलवारों की।

राह आसान कब मैंने चुनी,
पर राह मुश्किल भी नहीं।
राह-ए-हिन्द गर रहगुजर है,
सरपरस्ती जब अपनी मिट्टी की हो,
शोलों पर चलने की जब हस्ती हो।
लिबास-ए-फौज जब गुरूर हो,
और इबादत में शहादत मांगी हो।

हर फितूर के आगे इक फितूर,
हर सजदे के आगे इक सजदा,
हर शुकराने के आगे इक शुकराना,
हर मन्नत के आगे इक मन्नत,
कि अंजुमन-ए- हिन्द मेरी जन्नत हो।
खाक-ए-सुपुर्द होऊ तो
वतन-ए-हिन्द मेरा नशेमन हो,
मेरा नशेमन हो।
जयहिंद।

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