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23 Jul 2025 · 1 min read

सब भर्ती का सामाँ हैं

ग़ज़ल

तुम देखना पुरानी वो चाल फिर चलेंगे
जिससे जिना करेंगे उसको ही सज़ा देंगे

इक बेतुकी रवायत ऊपर से उनकी फ़ितरत
तकलीफ़ भी वो देंगे, बदला भी वही लेंगे

वरना वो तुझको हँसके कमज़ोर ही करेंगे
उनपर ज़रूर हँसना जो आदतन हँसेंगे

जब आएगी मुसीबत टीवी के शहर वाले
झाँकेंगें खिड़कियों से घर से नहीं निकलेंगे

ये शेर क्या हैं प्यारे, सब भर्ती का सामाँ हैं
गर पाँच नहीं होंगे तो कैसे ये छपेंगे

वो ही हैं नूर वाले जो अक्ल के हैं अंधे
जलवा भी वही लेंगे फतवा भी वही देंगे

-संजय ग्रोवर

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