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22 Jul 2025 · 1 min read

अब ना हम किसी से वादे हज़ार करते है।

अब ना हम किसी से वादे हज़ार करते है।
अब इन निग़ाहों को किसी के नज़रों में कैद रखते है।।
बंद रहती हैं अब सभी दर-ओ-दीवार की साकियाँ।
क्योंकि अब अपनी निग़ाहों को तेरी निगहबानी में कैद रखते है।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”

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