अथ श्री तबीयत महाकथा
व्यंग्य
अथ श्री तबीयत महाकथा
कल ऑफिस जाने का मन नहीं था।
तबीयत बिगड़ गई।
कवि सम्मेलन में पेमेंट कम था।
तबीयत बिगड़ गई।
सारी तैयारी थी। जयमाला होनी थी।
तबीयत बिगड़ गई।
बॉस ने हड़काया। दबाव बनाया।
तबीयत बिगड़ गई।
तबीयत एक नुस्खा है। काम का नुस्खा। यह कभी भी काम आ जाता है। स्वास्थ्य कारण है। यह कभी अकारण होते नहीं। ऐसे ही समझिए, जैसे आपका पेट खराब हो गया। कोई इसका क्या प्रमाण लेगा? मांग भी नहीं सकता। न कोई दे सकता है। तबीयत है। कभी भी बिगड़ सकती है। शक कोई कर नहीं सकता। बॉस भी इसके आगे मजबूर है। अक्सर बॉस की वजह से तबियत बिगड़ती है। न रोगी खुलसा करता है और न डॉक्टर।
तबीयत सामाजिक है। राजनीतिक है। पारिवारिक है। आर्थिक है। तबीयत वेद है। पुराण है। ऋषि मुनि हजारों साल पहले बता गए…कलियुग में इंसान बीमार पड़ेगा। बाकी युगों में किसी को छींक आने का भी जिक्र नहीं?
तबीयत एक औजार है। नागरिक और राजनीतिक शास्त्र है। एक शस्त्र है। मिसाइल है। इसका कभी न कभी हर कोई इस्तेमाल करता है। तबीयत कभी भी नासाज हो सकती है। वीणा के तार है। कभी भी ढीले पड़ सकते हैं। डॉक्टर तभी तो डॉक्टर हैं क्यों कि हर आदमी की तबीयत खराब है। किसी को बुखार है। किसी की सांस फूलती है। किसी का दिल कमजोर है। किसी के घुटने बैठ गए। किसी में शर्करा बढ़ गई। किसी की शर्करा बैठ गई। सब अस्पताल, नर्सिंग होम्स फुल हैं। क्यों कि सबकी तबीयत खराब है। अस्पताल फुल। लैब फुल। हेल्थ इज वेल्थ।
हेल्थ के लिए वेल्थ जरूरी है। वेल्थ न हो तो हेल्थ को बिगड़ने की इजाजत नहीं। बिगड़ जाए तो उनके लिए सरकारी अस्पताल हैं। जो समर्थ हैं, उनके लिए प्राइवेट है।
आप एक ‘तबीयत’ के चक्कर में गए। वहां पता चला, तबीयत तो और भी खराब है। और भी बहुत कुछ है,जिसका पता ही नहीं चला। आपकी हमारी तबीयत एक हब है। आपको अपना मोल पता नहीं। लाखों लोग इसी का पता लगाने में लगे हैं कि आपकी तबीयत क्यों खराब है?
देखिए। डॉक्टर नर्सिंग होम में तेजी से चलता है। उसको किसी को नमस्कार करने की फुर्सत नहीं। सरकारी अस्पताल में यही डॉक्टर धीरे चलता है। क्यों कि उसको फिक्र नहीं। नेता जी को नारियल फोड़ना हो तो वह तेज दौड़ता है। काम के वक्त उसकी चाल मंद पड़ जाती है। उसके कदमों से तेज उसकी वाणी चलती है। इसलिए राजनीति का योग है…वाणी व्यायाम करो। यह योग सामान्य योग में नहीं चलता।
ऑफिस में तो तबीयत राम बाण है। छुट्टी लेनी हो तो तबीयत खराब। काम करना हो तो तबीयत खराब। तबीयत के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए ही मेडिकल लीव का प्रोविजन है। फिरआकस्मिक अवकाश। सभी छुट्टी तबीयत की भेंट चढ़ती हैं।
तबीयत की तरबियत अनोखी है। तबीयत कुर्सी ले लेती है। नौकरी खा लेती है। इस्तीफे का कारण और भाषा एक होती है…यथा
“स्वास्थ्य और पारिवारिक कारण से मैं कार्य करने में असमर्थ हूं। इसलिए मैं अपने पद से त्यागपत्र दे रहा हूं। संस्थान ने मुझे बहुत प्यार और सम्मान दिया। आगे बढ़ाया। बहुत कुछ सीखने का अवसर दिया।”
आपने इस्तीफा दे दिया। मानव संसाधन विभाग उर्फ एचआर के बात गले नहीं उतरी। एक महीने का नोटिस क्यों नहीं दिया? यह अनिवार्य है। यानी तबीयत को बताना जरूरी है कि आगामी इस मंथ में आपकी तबीयत बहुत बिगड़ेगी। आप नौकरी भी नहीं कर पाएंगें।
तबीयत दीमक की तरह है। तबीयत मध्यम आय वर्ग में बीमारी और लाचारी के रूप में पाई जाती है। उच्च आय वर्ग में संपदा और राजनीति में कुर्सी के रूप में पाई जाती है। कमजोर, लाचार, मेहनतकश, रिक्शा वाले, ठेले वालों का तबीयत कुछ नहीं बिगाड़ती। क्यों कि… उन्हें इस्तीफा नहीं देना पड़ता।
22.07.2025
सूर्यकांत