आज देशकाल और वातावरण में जब दूसरे सर्वोच्च पद पर विराजित विभ
आज देशकाल और वातावरण में जब दूसरे सर्वोच्च पद पर विराजित विभूति क्षुब्ध व आहत है, तो आसानी से समझा जा सकता है कि इस कलुषित माहौल में एक आम आदमी की मनोदशा क्या होगी।
😞प्रणय प्रभात😞