रख मन में सद्भावना, करिए उत्तम कार्य।
रख मन में सद्भावना, करिए उत्तम कार्य।
उन्नति सबके संग में, करने वाला आर्य।।
कर्म हमारा हो सदा, फैलाता सौहार्द।
ईश्वर की माया मिले, समझ पराया दर्द।।
वाणी को निज कर्म से, जोड़ें रखकर प्रीत।
स्वार्थ भाव छल त्याग से, बन जाते सब मीत।।
किया आपका आपको, मिलना जगत विधान।
मन मूरख जब जानता, पाता नवल विहान।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)