Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
22 Jul 2025 · 1 min read

जी करता है सब दुनिया को बेपरदा कर दें

ग़ज़ल

लुटे-पिटे सब अरमानों का बदला किससे लें
कभी-कभी तो जी में आता हम भी ज़ुल्म करें

दुनिया में कोई ले आया, हम मजबूरों को
हक्के-बक्के बैठे हैं अब किससे बदला लें

जी करता है सब दुनिया को बेपरदा कर दें
लेकिन ख़ुदमें झांक के लगता, छोड़ें, रहने दें

जो गुस्ताख थे कई ने कितने ज़ुल्म किए दिन-रात
भला इसीमें है दुनिया का हम थोड़ा डर लें

किसीके दिल में घर क्या करना, बात बनाना क्या
अपने घर में किसी तरह बस वक़्त गुज़र कर लें

-संजय ग्रोवर

Loading...