किरदार
किरदार
जिंदगी के अरबों किस्से है,
बेहतर जिंदगी के कुछ ही हिस्से है।
बस कर अब बहुत हो गया!
मानव का मानव के साथ व्यवहार का पतन हो गया
क्या सत्ता पाकर इंसानी दामन की जतन हो गया।
फिक्र कर विद्या की मंदिर बंद हो रहा,
दिनोदिन मधुशाला खुल रहा।
स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा काल समाप्त।
फिर ओ काल आयेगा
जिनके अच्छे कारनामों के नाम खुद जाएगा।
मधुशाला पूरी बंद हो जाएगी
जगह – जगह शाला ही शाला नजर आएगी।
हर इंसान सुशिक्षित,सभ्य,
संस्कारी होगा
भारत वर्ष जग में महान होगा
हर इंसान फिर से दयावान होगा।
हर एक इंसान के किरदार मूल्यवान होगा।
साहित्यकार
कविराज संतोष कुमार मिरी”विद्या वाचस्पति”
रायपुर छत्तीसगढ़।