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22 Jul 2025 · 2 min read

मै जैसा हु वैसा ही रहूंगा

मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा(कहानी)

संतोष कुमार मिरी “विद्या वाचस्पति”

रायपुर_ यह कहानी मानव जाति एक है पर रूप – गुण -स्वभाव -धर्म के आधार पर अलग- अलग है;को रेखांकित करती है।प्रेमपरक कहानी है।
मयूरी और विवेक की अच्छी जोड़ी है,दोनों गृहस्थ जीवन जी रहे है ,तभी सब्जी वाले ने आवाज लगाई सब्जी ले लो।यह सुनकर मयूरी अपने पति से कहती है अजी! उठो भी सुबह के नौ बज रहे है ..कब तक सोते रहोगे सब्जी लेना है कि नहीं…
तभी पति ने झुंझलाकर कहा कि तुम्हे तो बाजार से सब्जी खरीदना पसंद है ठेले वाले से क्यों? तभी मयूरी झल्लाकर कह उठती है इतना भी नहीं समझते ऑफिस जाने का समय होने वाला है तैयार हो जाओ कहकर रजाई खींच लेती है। विवेक उठता है ब्रेड में मक्खन लगाकर खा कर चला जाता है ।
पत्नी मयूरी बड़बड़ाते हुए ड्राई फूड,पैकेजिंग आइटम टिफिन में रख दी थी।
मयूरी आधुनिक जीवन शैली के आधार पर एकदम फिट रहती है वहीं विवेक गांव का सीधा – सादा और समझदार आदमी है।
रोज -रोज के मयूरी के व्यवहार से विवेक तंग आ चुका था फिर भी पत्नी है करके उसके आधार पर ही चलता रहा।एक दिन मयूरी की तबियत अचानक खराब हो गई।अब सारे काम विवेक को करना है।विवेक ने पत्नी से शर्त रखा और कहा कि रोटी की साइज तिकोना बनेगा तो चलेगा बोली चल जाएगी?,ठेले वाले की सब्जी चलेगा ?चल जाएगा बार बार पुछने से पत्नी नाराज होकर चल जाएगा कह दी। विवेक ने भी सुना दिया।
देखो भई मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा चाहे तुम मुझे स्वीकार करो या न करो मुझे मेरी अंदाज में जीने दो
इधर मयूरी के पति बेचारे जिस संस्कार से पला बढ़ा है उसी मुताबिक उनका खान पान और इलाज करवाया।
विवेक ने अपने बीमार पत्नी को सुबह काढ़ा बनाकर दिया,ताजी तरकारी लेकर उसे गरम गरम सब्जी बनाकर खिलाया,गैस चूल्हा के बजाय लकड़ी जलाकर खाना बनाया,नहाने के लिए गरम पानी किया।
मयूरी ठीक हो गई।ठीक होने के बाद मयूरी प्यार भरी नजरों से विवेक को अपलक निहारते हुए कहने लगी कि भगवान करे मुझे इसी तरह से बार बार बीमार करे और आपके हाथ का बना बनाया खाना खाने का हर बार मौका मिले।विवेक ने मयूरी को बताया कि मैं अपने दादी मां से खाना बनाना सीखा था।किस्सा कहानी सुनते सुनते। दादी सौ साल के बाद भगवान के घर गई।
मयूरी के घमंड चूर चूर हो गई और अपने आधुनिक जीवन शैली को हमेशा के लिए छोड़ दी।
खेत जाने लगी ताजी फल तोड़ने,सब्जियां बटोरने उनकी आदत बन गया ।लहलहाते खेतों में मयूरी और विवेक सेल्फी ले ले लेकर मीडिया में डालने लगे,खुशी का इजहार करने लगे।
(कहानीकार संतोष कुमार मिरी ने लोगों के बदलती हुई जीवन शैली पर सवाल खड़ा किया है ।)

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