शिव शंकर के आसरे, चलता मेरा काम।
शिव शंकर के आसरे, चलता मेरा काम।
उनके हीं आशीष से, होता अपना नाम।।
कर्म, कल्पना, फल सभी, त्रिपुरारी का पाश।
पालन, पोषण सृजन कर, करते यही विनाश।।
शिव शंकर के आसरे, चलता मेरा काम।
उनके हीं आशीष से, होता अपना नाम।।
कर्म, कल्पना, फल सभी, त्रिपुरारी का पाश।
पालन, पोषण सृजन कर, करते यही विनाश।।