!!चम्चा युग!!
चम्चा युग भाई, चम्चा युग।
चारों तरफ है, चम्चा युग।।
चारों तरफ ये बिखरे पड़े हैं,
हर जगह मिले ये चम्चे,
बड़ा मजबूत है चम्चा युग।
चारों तरफ है चम्चा युग,
अच्छा -बुरा,बुरा-भला,
ताजी खबर दे चम्चा युग।
भला कराए बुरा कराए,
मजबूत बना दे ये चम्चा,
ऐसा प्यारा चम्चा युग।
अमीर से गरीब,
और गरीब से अमीर,
कराए चम्चा युग।
अपनों में तकरार,
और गैरों से प्यार,
व गलत कराए चम्चा युग।
सच्चाई में मर जाता है,
झूठ में पनपे चम्चा युग,
खतम न होता चम्चा युग।
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चम्चा युग भाई चम्चा युग।
चारों तरफ है चम्चा युग।।
स्वरचित रचना- डॉ० ओमवती ”यादकेत”