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21 Jul 2025 · 1 min read

उत्तम गुण है प्रेम का, प्रेममय करें सभी व्यवहार

उत्तम गुण है प्रेम का, प्रेममय करें सभी व्यवहार
परम पिता ने रच दिया, सत रज तम संसार
जीव और निर्जीव में, तीन गुणी है सार
रूप राशि रस गंध दे, दिया सुदृढ़ आकार
तीन गुणों से कर दिया, जीवन यह साकार
आत्म केंद्रित मत रहो, देखो नयन पसार
हर रचना भगवान की , नहीं कोई नि:सार
नष्ट ना कोई रचना करो, यही सृष्टि आधार
उत्तम गुण है प्रेम का, करो सभी व्यवहार
सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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