*प्यार*
‘प्यार’ एक खुबसूरत एहसास है!
‘प्यार’ तेजाब फेंकने की इजाजत नहीं देता।
‘प्यार’ दो आत्माओं का मिलन है,
‘प्यार’ किसी के मर्डर की इजाजत नहीं देता।
‘प्यार’ पवित्रता का नाम है,
‘प्यार’ गंदेपन की इजाजत नहीं देता ।
‘प्यार’ गॉड गिफ्ट है,
‘प्यार’ जबरदस्ती की इजाजत नहीं देता।
‘प्यार’ स्वर्ग की बारिश है,
जो हर जगह नहीं होती।
‘प्यार’ एक पवित्र बंधन है,
‘प्यार’ बिछड़ने की इजाजत नहीं देता।
‘प्यार’ एक खुशबू है,
जो हर चमन में नहीं होती।
सच्चे ‘प्यार’ में त्याग होता है,
‘प्यार’ दिखावे को इजाजत नहीं देता।
‘प्यार’ सच्चाई पर चलता है,
झूठ को इजाजत नहीं देता।
सच्चा ‘प्यार’ गरीबी में भी होता है,
‘प्यार’ धन दौलत की इजाजत नहीं देता।
‘प्यार’ प्यार मांगता है,
उसे अमीरी की जरूरत नहीं होती।
‘प्यार’ में अपनापन होता है,
यहां शातिरपन की इजाजत नहीं होती।
‘प्यार’ में हार की भी जीत होती है,
यहां जीत की कोई कीमत नहीं होती।
‘प्यार’ सर्वगुण संपन्न होता हैं,
‘प्यार’ किसी का बुरा करने की इजाजत नहीं देता।
स्वरचित रचना- डॉ० ओमवती ”यादकेत”