*लेकर रहिए बंधुवर, विश्व शांति सम्मान (हास्य कुंडलिया)*
लेकर रहिए बंधुवर, विश्व शांति सम्मान (हास्य कुंडलिया)
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लेकर रहिए बंधुवर, विश्व शांति सम्मान
लेना है नोबेल ही, मन में रखिए ठान
मन में रखिए ठान, आप दुनिया के दादा
क्या मजाल जो विश्व, आपसे करे न वादा
कहते रवि कविराय, धौंस दुनिया को देकर
बनिए तिकड़मबाज, विजेता मैडल लेकर
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज) रामपुर उत्तर प्रदेश
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