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21 Jul 2025 · 1 min read

सेकुलर फ़िरक़े ने उसकी नाक बचाली

ग़ज़ल

मैं पैदल था उसने अपनी कार निकाली
पर मेरी अय्याशी की तस्वीर बना ली

सांचे में गर ढल सकता तो मैं ढल जाता
पर जाने क्यों उसने मेरी नाप बना ली

फ़िर्क़ा-वाराना थी उसकी सब करतूतें
सेकुलर फ़िरक़े ने उसकी नाक बचाली

सेकुलर ने हर मज़हब के जोड़े कट्टरं
और फिर दावा ठोंका ख़ुल्ली जगह बनाली

इक रस्ते पर चले सदा, था उसका दावा
लेकिन उसकी बात हमेशा थी दो-नाली

-संजय ग्रोवर

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