*साम्ब षट्पदी---*
साम्ब षट्पदी—
21/07/2024
(1)- प्रथम-तृतीय तथा चतुर्थ-षष्ठम तुकांत
मौनी बाबा।
वाणी सिद्धि कर,
भरते सबकी ढाबा।।
लोकहितकारी सेवारत।
अपना जीवन जिसने होम दिया,
सबकी झोली भरती जो होते आरत।।
(2)- प्रथम-द्वितीय, तृतीय-चतुर्थ, पंचम-षष्ठम तुकांत
दानी बाबा।
हैं मंदिर काबा।।
मनवांछित जो पाते।
रोते आते हैं हँसते जाते।।
बस बम बम का तू जाप कर।
आशुतोष को मनाने गंगाजल धर।।
(3)- द्वितीय-चतुर्थ तथा षष्ठम, प्रथम तुकांत
कामी बाबा।
घूमे गली- गली।
कोई कहीं मिल जाये,
फूल हो या नयी कच्ची कली।।
मीठी बातों से सम्मोहित करते,
यही करवाते देश में खूनखराबा।।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
[][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][]