मन की खींचातानी से तू, कब कहाँ उबर पायेगा।
मन की खींचातानी से तू, कब कहाँ उबर पायेगा।
काल कोठरी में रहकर क्या, तू निर्द्वन्द्व नजर आयेगा।।
~ ननकी
मन की खींचातानी से तू, कब कहाँ उबर पायेगा।
काल कोठरी में रहकर क्या, तू निर्द्वन्द्व नजर आयेगा।।
~ ननकी