Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
21 Jul 2025 · 1 min read

मन की खींचातानी से तू, कब कहाँ उबर पायेगा।

मन की खींचातानी से तू, कब कहाँ उबर पायेगा।
काल कोठरी में रहकर क्या, तू निर्द्वन्द्व नजर आयेगा।।

~ ननकी

Loading...