सीमा पर लड़ने वाला, हर लाल देश का होता है।
सीमा पर लड़ने वाला, हर लाल देश का होता है।
लहू गिरे क़तरा-क़तरा, पर धैर्य कहाँ वो खोता है।
मातृभूमि की रक्षा में तुम, महाप्रयाण जब करते हो।
सजल होती हर एक आँख, तब जर्रा-जर्रा रोता है।
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’