हमसे किनारा कर रहे हैं by Vinit Singh Shayar
वो हम को बेसहारा कर रहे हैं
चले जाओ इशारा कर रहे हैं
हिज्र के मारों का हाल क्या हो
जैसे तैसे गुज़ारा कर रहे हैं
फ़लक तक साथ चलना था जिनके
वही हमसे किनारा कर रहे हैं
पटक कर पाव को पानी में अपने
वो दरिया को शरारा कर रहे हैं
सभी को ज़ुल्फ़ में उलझा के अपने
सभी को वो नकारा कर रहे हैं
~विनीत सिंह