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20 Jul 2025 · 1 min read

हमसे किनारा कर रहे हैं by Vinit Singh Shayar

वो हम को बेसहारा कर रहे हैं
चले जाओ इशारा कर रहे हैं

हिज्र के मारों का हाल क्या हो
जैसे तैसे गुज़ारा कर रहे हैं

फ़लक तक साथ चलना था जिनके
वही हमसे किनारा कर रहे हैं

पटक कर पाव को पानी में अपने
वो दरिया को शरारा कर रहे हैं

सभी को ज़ुल्फ़ में उलझा के अपने
सभी को वो नकारा कर रहे हैं

~विनीत सिंह

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