Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
20 Jul 2025 · 1 min read

दोहा त्रयी. . . . शृंगार

दोहा त्रयी. . . . शृंगार

शोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।
पावस रुत में फिर कहाँ, तन को रहता चेत ।।

अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।
तीव्र वृष्टि के दौर में, खूब हुए उत्पात ।।

बंधन टूटे लाज के, टूटी हर दीवार ।
मौन समर्पण से हुआ, प्रेम लोक साकार ।

सुशील सरना / 20-7-25

Loading...