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20 Jul 2025 · 1 min read

बोझ तले कंधे दबे, स्वप्न हुए सब नष्ट।

बोझ तले कंधे दबे, स्वप्न हुए सब नष्ट।
हाल बताये क्या जगत, अंतस में क्या कष्ट।।
संजय निराला

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