"पंथी"
पंथी ! पथ पर पग-चिन्ह बनाए जा।
ये कांटे ! कांटों में फूल खिलाए जा।।
दीन-दुखी गर कोई मिले तो,
पथ में मिले जो भुला-भटका,
भटके को राह दिखाए जा ।
पंथी—————
दीखे कोई लाचार बिचारा,
कोई हो विपदा का मारा,
उसको गले लगाया जा ।
पंथी ————-
मिले कोई बूढ़ा वेसहारा,
जिस पर अपनो ने जुल्म गुजरा,
ऐसों के काम कुछ आएगा जा।
पंथी ————–
पथ में मिले जो अबला नारी,
जिस पर कर्मों की लाचारी,
उसका जीवन सुलझाए जा।
पंथी ————–
पथ में मिले कोई बच्चा प्यारा,
भटका फिरे अपनों से न्यारा,
उसे पर भी प्यार लुटाए जा ।
पंथी—————