मुझमें और तुझमें फर्क
मुझमें और तुझमें फर्क यही है
तुम रूकने की बात करते हो पर
मैं चलने की बात करता हूँ
रखता हूँ हौसला ठोकरों में भी
तुम गिरने की बात करते हो मगर
मैं संभलने की बात करता हूँ
मुझमें और तुझमें…….
जिंदगी के मुश्किल पलों में देखो
तुम बिगड़ने की बात करते हो पर
मैं संवरने की बात करता हूँ
मुझमें और तुझमें…….
गिरती हैं मुशीबतें पहाड़ सी तो
तुम बिखरने की बात करते हो पर
मैं सिमटने की बात करता हूँ
मुझमें और तुझमें………
“V9द” जमाने की सुन-सुन के
तुम बहकने की बात करते हो पर
मैं महकने की बात करता हूँ
मुझमें और तुझमें………
स्वरचित
V9द चौहान