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19 Jul 2025 · 1 min read

बरसा सावन नेह भर, मिला धरा को मीत।

बरसा सावन नेह भर, मिला धरा को मीत।
बूँद-बूँद को शब्द कर, रचता मोहक गीत।।

भाव नवल ले गढ़ रहे, मेघ गगन में छंद।
रिमझिम बूँदें पढ़ रहीं, सुघड़ सलोने बंद।।

© सीमा

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