बरसा सावन नेह भर, मिला धरा को मीत।
बरसा सावन नेह भर, मिला धरा को मीत।
बूँद-बूँद को शब्द कर, रचता मोहक गीत।।
भाव नवल ले गढ़ रहे, मेघ गगन में छंद।
रिमझिम बूँदें पढ़ रहीं, सुघड़ सलोने बंद।।
© सीमा
बरसा सावन नेह भर, मिला धरा को मीत।
बूँद-बूँद को शब्द कर, रचता मोहक गीत।।
भाव नवल ले गढ़ रहे, मेघ गगन में छंद।
रिमझिम बूँदें पढ़ रहीं, सुघड़ सलोने बंद।।
© सीमा