वर्षा अब होने को है
वर्षा अब होने को है
बादल अब उभरने लगे,
आसमान काला होने लगा,
सुरज अब छुपने लगा,
रात- सा दिन होने लगा,
फुल खिलने लगे,
पेड़ झुमने लगे,
बादल गरजने लगे,
घर के दरवाजे खुलने लगे,
नदी में बहाव बढने लगा,
पक्षी अपने नीड़ की और जाने लगे,
बादल अब क्रीड़ा करने लगे,
और बरसने लगे ।
—– प्रणव राज