दिल में हमें बसाने वाले, दूर-दूर अब रहते हैं।
दिल में हमें बसाने वाले, दूर-दूर अब रहते हैं।
न जाने फिर भी क्यों मेरी, फ़िक्र हमेशा करते हैं।
लगता है थोड़ी सी, कसक अभी भी बाकी है।
इसीलिए हर महफ़िल में, ज़िक्र मेरा वो करते हैं।
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’