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18 Jul 2025 · 1 min read

ताख रख सब उलझनों को,

ताख रख सब उलझनों को,
चल चलें अवकाश पर मन !
खोल सब बंधन जगत के,
चल उड़ें आकाश में मन !

© सीमा

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