कैनवास
लिखने को तो मैं हज़ारों
अल्फ़ाज़ लिखना चाहता हूँ,
परंतु कोरे कागज पर नहीं,
तेरे मखमली बदन के कैनवास पर उकेरना चाहता हूँ…
मेरे दिल पे जो बीती हर
वो बात लिखना चाहता हूँ,
तुझसे जुड़े
अपने अहसास लिखना चाहता हूँ…
मैं हर वो अश्क हर
वो जज़्बात लिखना चाहता हूँ,
हर पंक्ति में
अपने प्यार को कैद करना चाहता हूँ….
तेरी याद में बीती हर
वो रात लिखना चाहता हूँ,
जीता आया हूँ तुम्हारे संग जो पल
वो हर पल तेरे मखमली बदन के कैनवास पर लिखना चाहता हूँ….
अपनी आम सी जिंदगी मैं
तुझे ख़ास बनाना चाहता हूं,
लेकिन आज
कलम खामोश है
दिख रही केवल रेखाएँ
जो मुझे सीमा में रहना सिखा रही हैं….
बैठा हूँ कोरा कागज़ लिए लेकिन लिखने को कुछ नहीं
भावो पर नियंत्रण सिखा रही है
अहसासों पर नियंत्रण सिखा रही है
मुझे ही मेरा भविष्य दिखा रही है
हाँ दिख रहा है मुझे:-
कोरा कागज़, कोरा काग़ज़, सिर्फ़ कोरा काग़ज़
परंतु मैं अपने नसीब को
कोरे काग़ज़ पर नहीं
जिंदगी भर के लिए
तेरे मखमली बदन के कैनवास पर उकेरना चाहता हूं…..