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18 Jul 2025 · 1 min read

बारिश की बौछार

बारिश की बूंदे जब
धरती से मिल जाती हैं
तवे सी गर्म धरती पर तब
सुकून की बौछार हो जाती हैं।
सूखे पत्तों में भी तब
हरियाली सी छा जाती है।
लहर उठते खेत खलिहान भी
इस बारिश की बौछार से।
स्वागत करते मोर भी
फैलाकर पंख और नाच से।
मेंढक की टरटर से
गुंज उठता माहौल है।
बारिश की रिमझिम से
महक उठता सारा जहान हैं।
इंसान भी इस मौसम में करने लगते
पकोड़े-भुट्टो के गुणगान हैं।
जब सूखी घास मिट्टी पर
पड़ती बारिश की बौछार है,
तब उसकी खुशबू से हमे
महसूस हो जाते तीर्थ चारों धाम है।

– श्रीयांश गुप्ता

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