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18 Jul 2025 · 1 min read

अपने मन के राज (तांटक छ्न्द )

अपने मन के राज खोल दो,
तब हल्का हो पाएगा।
लदा हुआ जो बोझा सिर पर,
सब खाली हो जाएगा।
मन में रखना राज कभी मत,
कठिन बहुत इसको ढोना।
विष फैलाता है जीवन में
पड़ता है छिप के रोना।
सत्पथ पर चलना है मधुकर
सच ही साथ निभाता है।
निश्छल जीवन सबसे उत्तम
ईश्वर तक पहुंँचाता है ।।

डाॅ. सरला सिंह “स्निग्धा”
दिल्ली

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