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18 Jul 2025 · 1 min read

पूजनीय जननी सभी,देती आविर्भाव।

पूजनीय जननी सभी,देती आविर्भाव।
ममता की संवेद ले, त्याग जगत सब काँव।।
पावन निश्छल गंग सी, मृदुल लिए संगीत।
रोज सहेजे लाल को, उपालंभ दे नीत।।
नित्य निरखती भाल यह, होती जगत निहाल।
विपदा आये लाल पर, करती सदा मलाल।।
जननी हरदम वंदनी, पूजा कर लो नित्य ।।
जीवन में औचित्य यह,यही निराला कृत्य ।।
संजय निराला

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