मुझसे रुठकर इश्क़ में वो ख़ुद को जला रहे हैं,
मुझसे रुठकर इश्क़ में वो ख़ुद को जला रहे हैं,
अकेले जिंदगी जीने का वो मकसद बता रहे हैं।
ये दिन और रात कैसे कटती है बिन तेरे हमदम,
ढाकर सितम वो इश्क़ का वो कैसे तड़पा रहे हैं।।
Phool gufran
मुझसे रुठकर इश्क़ में वो ख़ुद को जला रहे हैं,
अकेले जिंदगी जीने का वो मकसद बता रहे हैं।
ये दिन और रात कैसे कटती है बिन तेरे हमदम,
ढाकर सितम वो इश्क़ का वो कैसे तड़पा रहे हैं।।
Phool gufran