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18 Jul 2025 · 2 min read

भक्तों की भक्ति

व्यंग्य

भक्तों की भक्ति..

भक्त भक्त होते हैं। भक्त ज्ञानी होते हैं। भक्त अज्ञानी होते है। भक्त भावना के वशीभूत होते हैं। भगवान ही भक्त है। भक्त ही भगवान है। कुछ भी कहो, भक्त नहीं सुनता। जो सुन ले, वो भक्त क्या? भक्त और भक्ति निर्मल धार है। यह अंतर्मन से निकलती है। गंगा सागर पहुंचती नहीं। भक्त अजन्मा है। भक्ति अजर अमर है। भक्त किसी को भी किसी भी आसन पर बैठा सकता है। उतारता तो वह किसी को भी नहीं। आशाराम हो या राम रहीम। भक्ति अपनी जगह है। वह जेल में भी चलती है और रेल में भी। भक्ति हमारी रगों में खून की तरह दौड़ती है। हर सांस भक्ति रस का पान करती है। भक्त है तो भगवान है। भक्ति है तो भगवान है। भक्ति भावना है। भावना ही भक्ति है। इनका अंतर कोई नहीं बता सकता। भक्ति का कोई समय नहीं है। जब चाहो, मन मंदिर की घंटी बजा लो। भगवान सो जाते हैं। भक्त जागता रहता है। वह जब चाहे, भगवान को उठा दे। वह मनमर्जी का मालिक होता है। भगवान कहते है…बस कर…बहुत हो गई पूजा। अब आराम कर ले। भक्त तो भक्त है। उसकी भावना कहती है..और कर..और कर। तेरा यही कर्म है। तेरा यही धर्म है। जो सो रहे हैं, उनको जगा। उनको बता, तू परम प्रिय भक्त है। तेरे बिना भक्ति नहीं। तेरे बिना भगवान नहीं।
भावना का क्या करें? यह तो कभी भी पेट में मरोड़ की तरह उमड़ सकती है। इसका कोई निश्चित समय नहीं। टॉयलेट में भी भाव उमड़ सकते हैं। प्लेन और प्लेग में भी आ सकते हैं। सामने अर्थी पड़ी है। आँख से आंसू निकल रहे हैं। तभी भाव आ गए…लिख। हर महामारी, सर्जिकल स्ट्राइक, ग़म खुशी, पल पल…? इसका कोई मोल नहीं। इसका कोई तोल नहीं।
भक्ति दो प्रकार की होती है। साकार और निराकार। जो सामने है, उसकी भक्ति करो। पता नहीं, वो कब सुन ले। निराकार…वो सामने नहीं है। लेकिन भक्त कीर्तन कर रहा है। उसको व्यास पीठ से कोई मतलब नहीं। कोई भी बैठे। कुछ भी कथा कहे। भक्त तो राम धुन गाता रहता है। रघुपति राघव राजा राम। भक्त ने जो रट लिया। सो रट लिया।
यह पानी नहीं, अमृत है। पी लिया। भक्त न हैडपंप देखता है। न पुड़िया। भक्त जो ठहरा। वह भावना के वशीभूत होता है। पंच तत्वों को वह यही मानता है..ये न होते तो हमको यह भी नसीब नहीं होता। भक्त का कोई तोड़ नहीं। वह कुकर की सीटी में अपने मतलब की भांप निकाल लेता है। कुकर से निकली दाल को भी वह प्रभु प्रसाद मानता है। भक्ति के अपने अपने रंग होते है। अनगिनत प्रकार होते है। आप कौन से भक्त हैं। यह आप जानो। भक्त, भक्ति, भावना, भजन, भगवान और भाग्य। यह अनुप्रास खुश नसीबों को मिलता है।

सूर्यकांत

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