धरती माता की निरख छवि,मन मयूर नाचा रे
धरती माता की निरख छवि,मन मयूर नाचा रे
धरती माता मना रही,पावन श्रावण त्यौहार
पुरुषोत्तम अभिषेक कर रहे, रिमझिम पड़े फुहार
शिवमय सृष्टि प्रसन्न है, हरियाली चहुंओर
शैल शिखर, झरते झर झर,वन उपवन उठे हिलोर
कल कल छल छल वहतीं नदियां, मौसम है चितचोर
जीव ब़म्ह के अमर प्रेम की,
भिगो रहा रहा है पोर पोर,अंतस में अमृत घोल रहा
पुरषोत्तम पूजित शिव शक्ति,हर हर वम वम बोल रहा
उमड़ घुमड़ घन नाद कर रहे, ॐ कार सृष्टि उचारे
मंद सुगंधित मलय पवन,स स्वर वेद उचारे
नाना फल-फूल बनस्पति, सागर चरण पखारे
नील गगन की थाल आरती, अगणित जड़े सितारे
सूर्य चंद्र दो दीप दमकते,ग़ह नक्षत्र और तारे
नील पीत श्वेत श्याम, इन्द्रधनुषी छटा निराली
तरु पल्लव और पुष्प लताएं, घिरी घटाएं काली
नर किन्नर देव दनुज गंधर्व यक्ष नाग, नृत्य करें दे दे ताली
भोले बाबा दया करो,हम आए शरण तिहारी
पावन पुरषोत्तम मास की महिमा, वर्णित नहीं बनें रे
गांव शहर तीर्थ देवालय, नयनाभिराम छवि रे
धरती माता की निरख छवि,मन मयूर नाचा रे