साम्ब षट्पदी
साम्ब षट्पदी—
18/07/2024
(1)- प्रथम-तृतीय तथा चतुर्थ-षष्ठम तुकांत
महाबली।
नयी परिभाषा,
चर्चा रहे गली-गली।।
अणुबम की रखे कतारें।
आर्थिक संपन्नता में जो अग्रणी,
शत्रु भी जिनको मित्र कह के पुकारें।।
(2)- प्रथम-द्वितीय, तृतीय-चतुर्थ, पंचम-षष्ठम तुकांत
महामना।
करे सराहना।।
जिसके वंद्य चरण।
करता जो तारण तरण।।
हर काल में ऐसे होते आये हैं।
बस हम जिन्हें समझ नहीं पाये हैं।।
(3)- द्वितीय-चतुर्थ तथा षष्ठम, प्रथम तुकांत
महानदी।
हो रही क्रुद्ध।
जा रही फुँफकारती,
ढूँढ़ती कोई मति प्रबुद्ध।।
जो कर दे इसका शुद्धिकरण,
मन की मिटा दे अब तक जो त्रासदी।।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
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