तुम भी ख़ुश दुनिया भी ख़ुश
ग़ज़ल
भीड़ के संग में भंगड़ा डालो, तुम भी ख़ुश दुनिया भी ख़ुश
फिर चाहे जो लफ़ड़ा डालो, तुुम भी ख़ुुश दुनिया भी ख़ुश
पहले भी कब कहां पे तुमको क़ानूनों की चिंता थी
पैसे लो, बारात निकालो, तुुम भी ख़ुुश दुनिया भी ख़ुश
अगर पुराने ढंग में लौटें सारी दुनिया अपनी है
रस्ते में तुम खाट बिछा लो, तुुम भी ख़ुुश दुनिया भी ख़ुश
इश्तिहार गर प्यार का हो तो लोग अहिंसक कहते हैं
फिर तुम मुझको मार भी डालो, तुुम भी ख़ुुश दुनिया भी ख़ुश
बात बनानी आती हो तो तुरंत बात बन जाती है
चाहे जैसा काम निकालो, तुुम भी ख़ुुश दुनिया भी ख़ुश
हाथापाई करोगे दुनिया कर देगी बदनाम तुम्हे
टांग अड़ाओ, उंगली डालो, तुुम भी ख़ुुश दुनिया भी ख़ुश
तुम कितने भी सही हो इकले, दुनिया तुमको खा लेगी
भीड़ के सुर में ताल मिला लो, तुुम भी ख़ुुश दुनिया भी ख़ुश
-संजय ग्रोवर