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17 Jul 2025 · 1 min read

तो इस दिल में कहने को

तो इस दिल में कहने को
कुछ भी न होता,
अज़ीयत को दिल की
अगर हम समझते।
डॉ० फ़ौज़िया नसीम ‘शाद’

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