रतिया के गोदी मं 🌃🌓
🌙 रतिया के गोदी मं 🌙
रतिया के गोदी मं चंदा ह चमके,
टिमटिम तारा मन आसमान मं दमके।
थरथर पानिन ह सरसर बोले,
मन के भीतर सपना ह खोले।
झींगुर के राग गली-गली गूंजे,
बबा-दाई अंगना मं कथीकू बूंदे।
धनकुल रतिया ह चुपचाप बइठे,
जइसे गोंद मं महतारी बइठे।
चुप-चाप बगरत हे ठंडी बयार,
चांदनी के ओढ़ना ओ बगरे संसार।
बिरजुन के पेंड़ ह छइंहा मं लुके,
बगली ह सुट सुट करे बिन डरे जुके।
गांव के रतिया ह सुकुन भराए,
भूले बिसरहा बात ला सुनाए।
छानी के छेद ले झांकत हे तारा,
रतिया ह बने संगवारी हे हमन तिहार।
जितेश भारती ✍️