गज़ल
डायरी में खत पुराना रह गया।
बेखुदी में यह फसाना रह गया।।
ढूँढते थे हम-कदम को दरबदर।
मय-कदे में वह खजाना रह गया।।
ढह गये वादे वफा के काफिले।
हाल मेरा वो पुराना रह गया।।
अंजुमन में हम अकेले रह गये।
याद का ही बस सताना रह गया।।
क्या ख़बर थी चाहते थे हम उसे।
इश्क है उससे जताना रह गया।।
-गोदाम्बरी नेगी