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17 Jul 2025 · 1 min read

मुझे बोलने से ज़्यादा मौन रखना अच्छा लगता है,

मुझे बोलने से ज़्यादा मौन रखना अच्छा लगता है,
हर लम्हा अब खुद से जुड़कर जीना अच्छा लगता है।

पहले मैं हर चीज़ पर राज़ रखा करता था,
अब दिल का हर हाल लिख देना अच्छा लगता है।

सन्नाटों में बातें करना आदत सी बन गई,
अब भीड़ में खुद को खो देना अच्छा लगता है।

कभी तन्हाइयाँ दर्द देती थीं हर घड़ी,
अब इनसे दोस्ती कर लेना अच्छा लगता है।

दुनिया के शोर से दूर कहीं एक कोना हो,
जहाँ बस ख़ामोशी को सुनना अच्छा लगता है।

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