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17 Jul 2025 · 1 min read

प्यास दोहे

प्यास दोहे

अन्धेरा हो तो नहीं, पीछा करते दोस्त l
उजाला हो कभी नहीं, पीछे रहते दोस्त ll

जहाँ गंदगी हो वहाँ, बिछे न रहते दोस्त l
अति कट्टर हो लोग ना, अच्छे रहते दोस्त ll

अरविन्द व्यास “प्यास”

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