प्यास दोहे
प्यास दोहे
अन्धेरा हो तो नहीं, पीछा करते दोस्त l
उजाला हो कभी नहीं, पीछे रहते दोस्त ll
जहाँ गंदगी हो वहाँ, बिछे न रहते दोस्त l
अति कट्टर हो लोग ना, अच्छे रहते दोस्त ll
अरविन्द व्यास “प्यास”
प्यास दोहे
अन्धेरा हो तो नहीं, पीछा करते दोस्त l
उजाला हो कभी नहीं, पीछे रहते दोस्त ll
जहाँ गंदगी हो वहाँ, बिछे न रहते दोस्त l
अति कट्टर हो लोग ना, अच्छे रहते दोस्त ll
अरविन्द व्यास “प्यास”