अपना कर दो
तेरे एहसास से छूकर ही तो साँसें महकती हैं,
तेरी नज़रों से ही तो ये रूह सजती है…
आओ….
अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दो
अधूरा हूँ सदियों से मैं, मुझे मुकम्मल कर दो….
इस दिल को अपने रंग से भर दो,
जो सदियों से बेरंग है, उसे मुकम्मल कर दो…
आओ….
न तुम्हें होश रहे और न मुझे होश रहे
इस क़दर टूट के चाहो मुझे पागल कर दो…
मुझे ख़ुद से इस तरह जोड़ दो
कि चाहकर भी जुदा न हो सकूं,
आओ…
मुझे अपनी बाहों में क़ैद कर दो
इस कदर आजाद रहकर भी अपना कर दो…
धूप ही धूप हूँ मैं, टूट के बरसो मुझ पर
इस क़दर बरसो,मेरी रूह में अपना जल भर दो..
आओ….
मेरी हर साँस को, अपनी सुगंध भर दो
मेरी हर धड़कन को अपने प्यार की धड़कन दे दो..
तुम छुपा लो मेरा दिल, अपने दिल के ओट में
और मुझे मेरी निगाहों से ओझल कर दो
आओ…
मुझे इस मोहब्बत में इतना डूबा दो…
कि ख़ुद को भूल के ,
सिर्फ़ अपना कर दो…..