खुद की ग़लती दिखतीं कहां है
खुद की ग़लती दिखतीं कहां है
और औरों की छुपती कहां है।
यही सोच हर बार रफू करती
रहतीं हूं तेरे मेरे रिश्ते को,
कमबख्त ना जाने कहां
से ये खुशियां निकल जाती है।
निर्मला सिन्हा निशा 💞
खुद की ग़लती दिखतीं कहां है
और औरों की छुपती कहां है।
यही सोच हर बार रफू करती
रहतीं हूं तेरे मेरे रिश्ते को,
कमबख्त ना जाने कहां
से ये खुशियां निकल जाती है।
निर्मला सिन्हा निशा 💞