#खुली बातें
#खुली बातें
लिखना तो मैं बहुत चाहता हूँ और लिखता भी हूँ पर अवहेलना को स्वीकार मैं नहीं कर सकता हूँ ! मेरी कृतियों ,मेरे लेख ,मेरी कविता ,मेरे संस्मरणों और समालोचनाओं को आप पढ़ें या ना पढ़ें इसकी तनिक भी मुझे मलाल नहीं ! मैं जो भी लिखता हूँ वो मैं अपनी आत्म-संतुष्टि के लिए लिखता हूँ ! लिखना मैंने अपनी हॉबी बना रखी है ! परन्तु जब मैं किसी नए मित्रों को कोई संवाद लिखता हूँ तो उनके निरुत्तरता से उनकी नकारात्मक छवि उभरने लगती है ! नए मित्रों का स्वागत अपने संवादों में करता हूँ, पर विरले ही एक दो का जवाब आता है वरना लोग लाइक कर देते हैं ! जन्म दिन हो या कोई शुभमुहूर्त हो जब कभी मैं लिखता हूँ शायद ही किन्हीं का जवाब आया हो ! लोग फ्रेंड रिकुएस्ट तो कर देते हैं पर ना जाने फिर किस नेपथ्य में विलीन हो जाते हैं ऐसे लोग अकर्मण्यता के सूची में आते हैं ! उन्हें मित्र बना के क्या फाइदा ? @परिमल